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बिहार विधान परिषद में विपक्ष-सत्ता की टकराव से हंगामा, सभापति ने पूरे दिन के लिए विपक्षी सदस्यों को सदन से बाहर किया

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पटना। मंगलवार को बिहार विधान परिषद का सदन एक बार फिर हंगामे का केंद्र बन गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच हुई तीखी नोकझोंक के कारण सदन में कार्यवाही बाधित हो गई और सभापति को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी।
सूत्रों के अनुसार, प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष लगातार नारेबाजी करता रहा और सदन की कार्यवाही को बाधित करता रहा। सभापति ने कई बार चेतावनी दी कि प्रश्नकाल को व्यवधान नहीं बनने दिया जाएगा, लेकिन विपक्ष के सदस्य बेल तक पहुंचकर विरोध जारी रखे। स्थिति बिगड़ती देख सभापति ने पूरे विपक्षी दल को पूरा दिन के लिए सदन से बाहर रहने का आदेश दिया।
इस आदेश के बाद विपक्ष के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी सदन से बाहर जाने के लिए उठीं, लेकिन उन्होंने विरोध जताया। सभापति और राबड़ी देवी के बीच शाब्दिक नोकझोंक भी हुई। सभापति ने कहा, “सदन कार्यवाही करने के लिए है या हल्ला करने के लिए?” वहीं राबड़ी देवी ने जवाब में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह विरोध जताएंगी।
हंगामे के बीच राजद के सदस्य सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच भी तीखी झड़प हुई। आरोप है कि अशोक चौधरी ने गुस्से में सुनील सिंह को डांटते हुए कहा, “तुम्हारी औकात क्या है?” वहीं सुनील सिंह ने जवाब में मंत्री को “नौटंकीबाज” तक कह दिया। इस दौरान सदन में भारी शोर-शराबा और नारेबाजी का माहौल बना रहा।
स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए मार्शल को बुलाया गया। मार्शलों ने विपक्षी सदस्यों को अलग करके बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। विपक्ष ने कहा कि उन्हें बाहर निकालना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना था कि सदन की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
जानकारी के अनुसार, यह हंगामा केवल व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ते तनाव और राजनीतिक रणनीति का भी साफ झलक दिखाई दी। इस दौरान सदन के कई सदस्य अपनी सीट छोड़कर घटनास्थल पर पहुंचे और मार्शलों की मदद से स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
सियासी विश्लेषकों का कहना है कि बिहार विधान परिषद में इस तरह के हंगामे अक्सर विपक्षी दल के आक्रोश और सत्ता पक्ष की कार्रवाई के टकराव का परिणाम होते हैं। मंगलवार का यह विवाद इस बात का उदाहरण है कि सदन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मर्यादा बनाए रखने के लिए कठोर कदम भी जरूरी हो जाते हैं।
इस पूरी घटना के दौरान, सभापति ने बार-बार कहा कि सदन हल्ला करने का स्थान नहीं है और सभी को संयम बनाए रखना होगा। विपक्ष के नेताओं की ओर से भी यह संकेत मिला कि वे आगे के प्रयास में अपनी रणनीति बदल सकते हैं, लेकिन फिलहाल सदन के बाहर हंगामा जारी रहा।
सदन में हुई इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि विपक्ष-सत्ता के बीच बढ़ते टकराव और व्यक्तिगत आरोप कभी-कभी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी असर डाल सकते हैं, और भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए दोनों पक्षों को सावधानी बरतनी होगी।

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